हलवाई जैसा खस्तापन! बस ये 1 गुप्त चीज़ और दाल कचौरी बनेगी गुब्बारे जैसी फूली

नमस्ते दोस्तों! हम सभी को बाजार जैसी खस्ता दाल कचौरी बहुत पसंद होती है, लेकिन घर पर अक्सर वो गुब्बारे जैसी नहीं फूलती या फिर कुछ देर बाद नरम पड़ जाती है। एक कामकाजी प्रोफेशनल होने के नाते, मुझे पता है कि हमारे पास घंटों रसोई में खड़े रहने का समय नहीं होता। इसलिए, आज मैं आपके साथ अपनी वो खास रेसिपी शेयर कर रही हूँ जो न केवल समय बचाती है, बल्कि आपको वही हलवाई वाला स्वाद और क्रंच भी देगी। इस रेसिपी में मैंने कुछ ऐसी ट्रिक्स बताई हैं जिससे आपकी कचौरी पहली बार में ही परफेक्ट बनेगी और तेल भी कम सोखेगी। चलिए, आज शाम की चाय के लिए कुछ खास बनाते हैं और अपने परिवार को सरप्राइज देते हैं!

समय विवरण

तैयारी का समय: 20 मिनट

पकाने का समय: 40 मिनट

आराम/सेटिंग का समय: 30 मिनट

कुल समय: 90 मिनट

कठिनाई स्तर: मध्यम

परोसने की मात्रा: 4-5 लोग

पोषण जानकारी (अनुमानित)

कैलोरी: 280 kcal | प्रोटीन: 6g | कार्ब्स: 32g | फैट: 14g

खस्ता दाल कचौरी की सामग्री

  • 2 कप मैदा (आप चाहें तो 1 कप मैदा और 1 कप गेहूं का आटा ले सकते हैं)
  • 1/2 कप पीली मूंग दाल (2 घंटे भिगोई हुई)
  • 1/4 कप शुद्ध घी या तेल (मोयन के लिए)
  • 1/2 छोटा चम्मच अजवाइन
  • स्वादानुसार नमक
  • 2 बड़े चम्मच बेसन (नमी सोखने के लिए)
  • 1 छोटा चम्मच सौंफ (दरदरी पिसी हुई)
  • 1 छोटा चम्मच साबुत धनिया (दरदरा कुटा हुआ)
  • 1/2 छोटा चम्मच जीरा
  • 1/4 छोटा चम्मच हींग (पाचन और स्वाद के लिए)
  • 1 छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर
  • 1/2 छोटा चम्मच हल्दी पाउडर
  • 1 छोटा चम्मच गरम मसाला
  • 1 छोटा चम्मच अमचूर पाउडर या चाट मसाला
  • 1 बड़ा चम्मच बारीक कटा हरा धनिया
  • तलने के लिए रिफाइंड तेल
  • आवश्यकतानुसार गुनगुना पानी

खस्ता दाल कचौरी बनाने की विधि

  1. सबसे पहले एक बड़े मिक्सिंग बाउल में 2 कप मैदा छान लें। इसमें आधा छोटा चम्मच अजवाइन को हथेलियों के बीच रगड़कर डालें और स्वादानुसार नमक मिलाएं। अब इसमें 1/4 कप घी डालें। ध्यान रहे, खस्ता कचौरी का सबसे बड़ा राज ‘मोयन’ ही है। घी को मैदे में तब तक अच्छी तरह मलें जब तक कि मैदा मुट्ठी में बांधने पर अपनी शेप न ले ले। अगर मैदा बिखर रहा है, तो 1 चम्मच घी और डालें। अब थोड़े-थोड़े गुनगुने पानी का उपयोग करते हुए एक नरम और लचीला आटा गूंथ लें। आटा न तो बहुत सख्त होना चाहिए और न ही बहुत ज्यादा गीला। गूंथे हुए आटे को एक गीले सूती कपड़े से ढंककर 20-30 मिनट के लिए आराम (rest) करने दें। इससे मैदे का ग्लूटेन रिलैक्स होगा और कचौरियां फटेगी नहीं।
  2. भिगोई हुई मूंग दाल का सारा पानी निकाल दें और इसे मिक्सर में दरदरा पीस लें। ध्यान रहे कि दाल का पेस्ट नहीं बनाना है, बस एक-दो बार पल्स मोड पर चलाएं। अब एक कड़ाही में 2 चम्मच तेल गरम करें। इसमें हींग, जीरा, कुटा हुआ धनिया और दरदरी सौंफ डालें। जैसे ही मसालों से खुशबू आने लगे, इसमें 2 चम्मच बेसन डालें और धीमी आंच पर 1-2 मिनट तक भूनें। बेसन कचौरी की स्टफिंग को बाइंडिंग देता है और दाल की अतिरिक्त नमी को सोख लेता है। अब इसमें दरदरी पिसी हुई दाल डालें और अच्छी तरह मिलाएं।
  3. दाल के मिश्रण में हल्दी, लाल मिर्च पाउडर, गरम मसाला, अमचूर पाउडर और नमक डालें। मध्यम आंच पर दाल को तब तक भूनें जब तक कि वह पूरी तरह सूख न जाए और उसमें से सोंधी महक न आने लगे। अगर मिश्रण ज्यादा सूखा लगे तो एक छोटा चम्मच पानी छिड़क सकते हैं। अंत में बारीक कटा हरा धनिया मिलाएं और गैस बंद कर दें। इस मसाले को एक प्लेट में निकाल कर पूरी तरह ठंडा होने दें। जब मसाला ठंडा हो जाए, तो इसकी छोटी-छोटी नींबू के आकार की गोलियां बना लें। इससे कचौरी भरते समय आसानी होती है और हाथ गंदे नहीं होते।
  4. अब तैयार आटे को एक बार फिर से हल्के हाथों से मल लें। आटे की छोटी-छोटी लोइयां तोड़ें (स्टफिंग की बॉल से थोड़ी बड़ी)। एक लोई लें और उसे किनारों से पतला करते हुए कटोरी जैसी शेप दें। बीच का हिस्सा थोड़ा मोटा रखें ताकि कचौरी तलते समय फटे नहीं। अब दाल की एक गोली को बीच में रखें और आटे के किनारों को ऊपर लाते हुए अच्छी तरह सील कर दें। अतिरिक्त आटा हटा दें और कचौरी को हल्के हाथों से दबाकर चपटा करें। याद रखें, कचौरी को बेलन से नहीं बेलना है, बस हथेली के बीच रखकर धीरे से दबाएं ताकि स्टफिंग चारों तरफ बराबर फैल जाए।
  5. एक कड़ाही में पर्याप्त तेल गरम करें। यही वो स्टेप है जहाँ अक्सर लोग गलती करते हैं। तेल बहुत ज्यादा गरम नहीं होना चाहिए। तेल का तापमान चेक करने के लिए आटे का एक छोटा टुकड़ा डालें, वह धीरे से ऊपर आना चाहिए। अब कड़ाही में 3-4 कचौरियां डालें (कड़ाही को बहुत ज्यादा न भरें)। आंच को बिल्कुल ‘लो’ (धीमी) रखें। 4-5 मिनट तक कचौरियों को बिल्कुल न छुएं, वे धीरे-धीरे अपने आप तेल के ऊपर तैरने लगेंगी। जब वे ऊपर आ जाएं, तब आंच को हल्का सा बढ़ाकर ‘लो-मीडियम’ कर दें और उन्हें पलट दें। दोनों तरफ से सुनहरा भूरा (Golden Brown) होने तक तलें। एक बैच को तलने में लगभग 12-15 मिनट का समय लगेगा।
  6. जब कचौरियां पूरी तरह से फूल जाएं और उन पर एक समान सुनहरा रंग आ जाए, तो उन्हें एक जालीदार कलछी (skimmer) की मदद से निकाल लें। इन्हें किचन टॉवल या टिश्यू पेपर पर रखें ताकि अतिरिक्त तेल निकल जाए। आपकी गरमागरम, बाजार जैसी खस्ता दाल कचौरियां तैयार हैं! इसी तरह बाकी की कचौरियों को भी तल लें। ध्यान रखें कि दूसरा बैच डालने से पहले तेल को 2 मिनट के लिए थोड़ा ठंडा होने दें, वरना ऊपर से कचौरी लाल हो जाएगी और अंदर से कच्ची रह जाएगी।

सामान्य गलतियां

  • तेल का बहुत ज्यादा गरम होना: अगर आप तेज आंच पर तलेंगे, तो कचौरियों की बाहरी परत पर बुलबुले आ जाएंगे और वे खस्ता नहीं बनेंगी।
  • मोयन की कमी: अगर मैदे में घी कम होगा, तो कचौरी खस्ता होने के बजाय सख्त या रबड़ जैसी हो जाएगी।
  • दाल में नमी रह जाना: अगर स्टफिंग गीली होगी, तो कचौरी तलने के बाद जल्दी नरम पड़ जाएगी। बेसन डालकर नमी सुखाना जरूरी है।
  • ठीक से सील न करना: अगर कचौरी के किनारे अच्छी तरह बंद नहीं होंगे, तो तलते समय मसाला बाहर निकल आएगा और सारा तेल खराब हो जाएगा।

वेरिएशन

  • हेल्दी ट्विस्ट: मैदे की जगह पूरी तरह से गेहूं के आटे का उपयोग करें और कचौरी को डीप फ्राई करने के बजाय एयर फ्रायर में 180°C पर 15-20 मिनट के लिए बेक करें।
  • उड़द दाल कचौरी: मूंग दाल की जगह आप भीगी हुई धुली उड़द दाल का उपयोग भी कर सकते हैं, जिसका स्वाद और भी सोंधा होता है।
  • प्याज-दाल कचौरी: स्टफिंग में दाल भूनते समय बारीक कटा हुआ प्याज डालें, इससे स्वाद और बढ़ जाता है (ध्यान रहे प्याज का पानी पूरी तरह सूख जाए)।

परोसने के सुझाव

इन खस्ता कचौरियों को गरमागरम ‘हलवाई वाली आलू की सब्जी’, तीखी हरी चटनी और खट्टी-मीठी इमली की चटनी के साथ परोसें। यदि आप वर्किंग प्रोफेशनल हैं, तो इन्हें सुबह बनाकर एयर-टाइट कंटेनर में रख सकते हैं और शाम को चाय के साथ हल्का गर्म करके आनंद ले सकते हैं।

आपकी राय

क्या आपने कभी दाल कचौरी में बेसन डालकर ट्राई किया है? हमें कमेंट में बताएं कि आपकी कचौरी कैसी बनी और इस रेसिपी को 5-स्टार रेटिंग देना न भूलें!

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